लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की एक घटना

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देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अपने कार्यकाल के दौरान देश को कई संकटों से उबारा. साफ-सुथरी छवि के कारण ही विपक्षी पार्टियां भी उन्हें आदर और सम्मान देती है. जानिए उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जिसे आप अभी तक नहीं जानते होंगे।

2 अक्टूबर को शास्त्री जी की 114वीं जयंती है। उनका जन्म यूपी के चंदौली जिले के मुगलसराय में हुआ। परिवार में सबसे छोटा होने के कारण लोग प्यार से 'नन्हे' कहकर ही बुलाया करते थे। जब ये 18 महीने के हुए तब उनके पिता का निधन हो गया। इनकी मां रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्जापुर चली गईं। ननिहाल में रहते हुए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। वे नदी तैरकर स्कूल जाते थे।



आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें वाराणसी में चाचा के साथ रहने के लिए भेज दिया गया। उनके बाद की शिक्षा हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में हुई। देश के सर्वाधिक सम्मानित नेताओं में देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम भी बहुत आदर से लिया जाता है। वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को अपनी मृत्यु तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। आइये जानते हैं शास्त्री जी के जीवन से जुड़ी एक घटना।

शास्त्री जी ने जिम्मेदारी के चलते माँ से छुपाई अपनी पहचान :
एक बार की बात है शास्त्री जी रेलवे के एक कार्यक्रम में आये हुए थे। तभी कुछ देर बाद उनकी माँ भी पूछते पूछते वहाँ पहुंच गई और कहने लगी मेरा बेटा यहाँ आया है। और वो रेलवे मैं काम करता है। वहाँ खड़े लोगों मैं से किसी ने उनसे पूछा क्या नाम है आपके बेटे का तो उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री बताया। यह सुन वहां खड़े सभी लोग अचंभित रह गए। ओर लोग बोलने लगे की वो ,झूठ बोल रही हैं।

शास्त्री जी की माँ बोलने लगी वो यहाँ आये है , और वो यही कही होंगे।
तभी वहां खड़े एक शख्स ने लाल बहादुर जी को दिखाते हुए पूछा वही आपके बेटे है - तभी उनकी माँ बोलने लगी , हाँ हाँ वो ही मेरा बेटा हैं। तब भी उस शख्स को विश्वास नहीं हुआ , उसने शास्त्री जी को इशारा करते हुए उनकी माँ की ओर दिखाया , पूछा क्या वो आपकी माँ हैं।

तभी लाल बहादुर शास्त्री जी उठ कर आये और उन्होंने अपनी पास वाली सीट पर अपनी माँ को बिठाया। कुछ समझ बाद उन्हें घर भेज दिया।माँ के जाने के पश्चात शास्त्री जी ने अपना भाषण शुरू ही किया था जब तक वहां आये एक पत्रकार ने शास्त्री जी से पूछा , अपने अपनी माता जी के आगे भी  भाषण क्यों नहीं दिया ?? 

तब शास्त्री जी ने बताया मेरी माँ को ये नही पता मैं एक रेल मंत्री हूँ। मैंने आज तक अपनी माँ को ये बताया है कि मैं रेलवे मैं एक कर्मचारी हूँ। अगर उन्हें ये पता चल जाएगा कि मैं एक रेल मंत्री हूं , तो वो मुझसे सिफारिश लगाने लगेगी और में उन्हें मना भी नहीं कर पाऊंगा। मेरी माँ को एक अहंकार आ जायेगा। रिश्तों मैं भी दरारे आ जायेगी ।

मैं अपनी जिम्मेदारी के बीच, रिश्तों की दरार नहीं लाना चाहता। शास्त्री जी की यह बात सुनकर वहाँ आये हुये लोग सन्न रहे गए। कार्यक्रम तालियों की गूंज से झूम उठा।

आज भी ऐसे ईमानदार लोगों को याद किया जाता है।







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