दशरथ मांझी “माउंटेन मैन” की कहानी

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दशरथ मांझी “माउंटेन मैन” की कहानी
(जन्म: 1934 - 17 अगस्त 2007)
                        

हिंदी मेरी पहचान मैं आपका स्वगत करती हूँ। आज यह मे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बता रही हूँ ।जिसने ऐसा मुक़ाम हासिल किया कि उनके जाने के बाद उनके बनाये रास्ते पर लोग उन्हें अपनी ही परछाई मै ढूढते हैं।


दशरथ मांझी  जिन्हें "माउंटेन मैन" के रूप में भी जाना जाता है । दशरथ मांझी, एक ऐसा नाम जो इंसानी जज्‍़बे और जुनून की मिसाल है।दशरथ मांझी एक बहेद पिछडे इलाके से आते थे और दलित जाति से थे दशरथ मांझी जो बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे।उन्होनें केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली। 22 वर्षों के परीश्रम के बाद, दशरथ की बनायी सड़क ने अतरी और वजीरगंज ब्लाक दूरी को 55 किलोमीटर से 15 किलोमीटर कर दिया।  
    
जीवन चरित्र  :                 

दशरथ मांझी काफी कम उम्र में अपने घर से भाग गए थे और धनबाद की कोयले की खानों में उन्होनें काम किया। फिर वे अपने घर लौट आए और फाल्गुनी देवी (दशरथ मांझी की पत्नी )से शादी की। दशरथ मांझी पहाड़ पर लकड़ी  काटते थे।उनकी पत्नी उनके लिए खाना ले जाते समय पहाड़ के दर्रे में गिर गयी । और उनका निधन हो गया। अगर फाल्गुनी देवी को अस्पताल ले जाया गया होता तो शायद वो बच जाती  । यह बात उनके मन में हमेशां के लिए दर्द बन  गई। इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले अपने दम पर वे पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकालेगे और जिस दर्द से उन्हें गुजरना पड़ा उस दर्द से फिर कभी कोई और न गुजरे फिर उन्होंने 360 फ़ुट-लम्बा (110 मी), 25 फ़ुट-गहरा (7.6 मी) 30 फ़ुट-चौड़ा (9.1 मी)गेहलौर की पहाड़ियों से रास्ता बनाना शुरू किया। इन्होंने बताया, “जब मैंने पहाड़ी तोड़ना शुरू किया तो लोगों ने मुझे पागल कहा लेकिन इस बात ने मेरे निश्चय को और भी मजबूत किया। 

निर्माण कार्य :

उन्होंने अपने काम को 22 वर्षों (1960-1982) में पूरा किया। इस सड़क ने गया के अत्रि और वज़ीरगंज सेक्टर्स की दूरी को 55 किमी से 15 किमी कर दिया। माँझी के प्रयास का मज़ाक उड़ाया गया पर उनके इस प्रयास ने गेहलौर के लोगों के जीवन को सरल बना दिया आज लोग उनके जाने के बाद उन्हें अपनी ही परछाई मै ढूढते है।
हालांकि उन्होंने एक सुरक्षित पहाड़ को काटा, जो भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम अनुसार दंडनीय है फिर भी उनका ये प्रयास सराहनीय है। बाद में मांझी ने कहा , पहले-पहले गाँव वालों ने मुझपर ताने कसे लेकिन उनमें से कुछ ने मुझे खाना दीया और औज़ार खरीदने में मेरी सहायता भी की।

स्वर्गवास :


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (all India Institute of Medical Sciences (AIMS) एम्स), नई दिल्ली में पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) के कैंसर से पीड़ित मांझी का 73 साल की उम्र में, 17 अगस्त 2007 को निधन हो गया। बिहार की राज्य सरकार के द्वारा उनका अंतिम संस्कार किया गया मांझी ‘माउंटेन मैन’ (Mountain Man) के रूप में विख्यात हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में पद्म श्री हेतु उनके नाम का प्रस्ताव रखा। मार्च 2014 में प्रसारित टीवी शो सत्यमेव जयते का सीजन 2 जिसकी मेजबानी आमिर खान ने की, उनका पहला एपिसोड दशरथ मांझी को समर्पित किया गया। 

 सम्मान :

मांझी 'माउंटेन मैन' के रूप में विख्यात हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए बिहार सरकार ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 2006 में पद्म श्री हेतु उनके नाम का प्रस्ताव रखा। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दशरथ मांझी के नाम पर रखा गहलौर से 3 किमी पक्की सड़क का और गहलौर गांव में उनके नाम पर एक अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव रखा है।

दशरथ मांझी का वक्तव्य :

अपने बुलंद हौसलों और खुद को जो कुछ आता था, उसी के दम पर मैं मेहनत करता रहा. संघर्ष के दिनों में मेरी मां कहा करती थीं कि 12 साल में तो घूरे के भी दिन फिर जाते हैं. उनका यही मंत्र था कि अपनी धुन में लगे रहो. बस, मैंने भी यही मंत्र जीवन में बांध रखा था कि अपना काम करते रहो, चीजें मिलें, न मिलें इसकी परवाह मत करो. हर रात के बाद दिन तो आता ही है.

       

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