माँ सीमा से तार आया है

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                                   हिंदी मेरी पहचान  मैं आप सभी का स्वागत करती हुँ। यहां में ऐसे परिवार की पीड़ा को अभिव्यक्त करना चाहती हुँ जिसके घर का एक बेटा सेना मैं सेवा देते हुए कैसे शहीद हो गया। ये उस समय की बात है जब घरों मैं टेलीविजन, मोबाइल, ओर इंटरनेट की सुविधा नहीं थी।

शहीद अपनी अपनी पत्नि को एक खत (चिठ्ठी) लिखता है और सीमा पर दुश्मन के आने के कारण घर आने मैं देरी हो जाएगी ऐसा लिखता है। जैसे ही ये खत घर पहुँचता हैं।  डाक बाबू - आवाज लागते हुए चिठ्ठी - चिठ्ठीआयी तभी शहीद की बेटी जो खेल रही होती है , भाग कर आ कर वो चिठ्ठीले लेती है। उसके बाद वो बच्ची अपनी माँ को आवाज देती है "माँ  सीमा से तार आया है ", ये सुन उस बच्ची की माँ भागती हुई आती है और उस चिठ्ठी को ले कर चूमने लगती है ,और खुशी से झूमती हुई अपने कमरे मैं जा कर उसको खोलती है।

 चिठ्ठी की खुशी उसे इतनी होती है की जिसे कहने मैं शब्द नही होते। थोड़ी मायूस हो जाती पति के घर देरी से आने पर चिठ्ठी आने की वो  खुशी कम नही होती।

अचानक दो दिन बाद फिर एक खत सीमा से आता है ,जिसे खुद शहीद की पत्नी खुद डाक बाबू-  से लेती है पर ये खत लेते हुई उसे कुछ अनहोनी का अहसास हो जाता है । ये खत जिसको पढ़कर वो वही आँगन मूर्छित हो गिर जाती है।

इस स्थिति को लेकर अपने विचारों को कविता के माध्यम से देश के वीर जवानों को देश के सभी नागरिकों की तरफ समर्पित -

जाने कैसी पीड़ा अंदर से निकल रही
मैं कैसे  गाउ गीत देश की सीमा शोले उगल रही|| 

जिसको दोस्त समझ कर मेरा ,मन था ईद मनाने का 
उसका काला मन था मेरी दिवाली के दिये बूक्षाने को 
हो कर के तैयार खडा तेज़ाब भारी  पिचकारी मैं
आग लगना चाही  उसने मेरी हरि भारी फुलवारी मैं
केसर की क्यारी से दहशत की ज़वाल निकल रही ||


मैं कैसे  गाउ गीत देश की सीमा शोले उगल रही 

 आग जहाँ भी लगे पक्ष दोनो ही सुलगते हैं
 ऐसे मसले जितने भी प्यार से ही सुलझते है
   नही खड़ी कोई छत अब तक नफरत की दीवारों पर   
 फिर दुश्मन गौर नही करता अपनी पिछली हारो पर  
 गरम खून के मारे मेरी धमनियाँ उबल रही
   मैं कैसे  गउ गीत देश की सीमा शोले उगल रही|| 

कल ही चिट्ठी आयी थी मैन जल्द न आ पाउँगा
दुशमन सीमा पर बैठा है मैं पहले उसे भगाउगा
सोना अभी छोटा हैं तु प्यार से समझा लेना
मुनि के कपडे बाज़ार से ओर मां को साड़ी ले आना||

श्याम भइया से कहना अबकी प्रथम (कक्षा) जो आएगा
उसका ये भईया उसे घडी जरूर दिलाएगा
छोटी बेहना से कहना राखी पर जो आएगी 
अपने भैया के घर से झोली भर ले जाएगी
मुखिया ताऊ से चलते मैं ,वक़्त नही मिल पाया था 
पूज्य पिता के चरण छू मैं जल्दी आया था
क्षमा माँगता उन्हें सभी से अंत मैं तुमको प्यार मेरा
इन्हीं तुम्हारी आँखों मैं  सपनो का संसार मेरा||

दो दिन बीत न सके एक तार आ गया  सीमा से 
लड़ते हुए शहीद हो गया बिछड गया बेटा मां से
जब क्षत विक्षत अर्थी हाहाकार मचा था घर में
हृदयँ विराकर करदन था उस बूढ़ी सी माँ के स्वर मैं
 धीरज धरा पलट कर देखा घाव सभी थे छती पर
  दीपक बूक्ष तो गया चमक अभी भी बाती पर||

जीन हाथों ने घुघट खोला ,वो हाथ उसे कटे मिले
जीन अधरों ने मुख को चूमा ,वो भी उसे कटे मिले
क्या कसूर था उस दुल्हन का जो जीवन से बिछड़ गयी
मेहदी फिकी पड़ी नही की वो प्रीतम से बिछड़ गयी||
धू धू जलती चिता देख नयन हजारों झलक पड़े
धारती रोयी अम्बर रोया ओर सितारे बिलख पडे
पर आँच नही आने दी कश्मीर की कश्मीर की पयारी घाटि को 
न जाने मतभूमी पर मर मिटने को कितनी ज़वानी मचल रही
मैं कैसे  गाउ गीत देश की सीमा शोले उगल रही||


||जय हिन्द जय जवान जय किसान जय विज्ञान||

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