साल का पहला सूर्य ग्रहण : 2018

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15 फरवरी को सूर्य ग्रहण पड रहा है। वर्ष 2018 में कुल
 पांच ग्रहण लग रहे है : 3 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण।ये साल का 2018 का पहला सूर्य ग्रहण है इसके बाद दूसरा सूर्य ग्रहण 13 जुलाई 2018 और तीसरा 11अगस्तल 2018 को पड़ेगा ।

हिन्दू मान्यता ओर ज्योतिषों के अनुसार ग्रहण समय मैं भगवान पर कष्ट पड़ता है लेकिन विज्ञान के अनुसार ये एक खगोलीय घटना हैं जिसमें पृथ्वी, सूर्य ओर चंद्रमा अपनी स्थति से हटकर एक सीध मैं आ जाते हैं। 

इस ग्रहण को देखने के लिए लोगों मैं उत्सुकता बनी रही है । सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर व्यूइंग ग्लासेस या पर्सनल सोलर का इस्तेमाल करते है वहीं ज्योतिषी के अनुसार ग्रहण
को देखना अशुभ माना जाता है । ग्रहण के समय मंदिरों को भी नही खुला रखा जाता है।

जानते है आखिर ग्रहण क्या है ?
ऐसा क्या कारण है जिसके चलते ग्रहण को देखना अशुभ माना जाता हैं।  जाने यह पौराणिक कथा कि वो काहनी जिस वजह से इंसान को ही नहीं भगवान को भी ग्रहण नहीं दिखया जाता।


ग्रहण का समय?

यह ग्रहण 15 फरवरी (गुरुवार) की रात 12.25 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी सुबह 4.18 तक रहेगा. हालांकि सूतक काल ग्रहण के लगभग 12 घंटे पहले यानी 15 फरवरी सुबह 11.35 पर शुरू हो जाएगा. सूर्यग्रहण अमावस्या के दिन होता है. जबकि चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन पड़ता है. आगे जानें कहां होगा इस ग्रहण का दीदार. 


कहां दिखेगा सूर्यग्रहण?

भारतीय समय के अनुसार यह सूर्यग्रहण रात के समय है, इसी वजह यह भारत में नहीं दिखाई देगा. यह दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका, उरुग्वे और ब्राजील जैसे देशों में देखा जाएगा. अंटार्कटिका में यह अधिक देखा जाएगा.


क्या कहती है पौराणिक कथा :

पौराणिक कथा के अनुसार मत्स्य पुराण में सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण की कथा का संबंध राहु-केतु और उनके अमृत पाने की कथा से है। कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने मोहनी कन्या का रूप धारण कर  देवताओं को अमृत और असुरों को वारुणी (एक प्रकार की शराब) बांट रहे थे तब एक दैत्य स्वरभानु रूप बदलकर देवताओं के बीच जा बैठा। वह सूर्य और चन्द्रमा के बीच बैठा था। जैसे ही वह अमृत पीने लगा सूर्य और चन्द्रमा ने उसे पहचान लिया और तत्काल विष्णु जी को बता दिया।

विष्णु जी ने तत्काल उस राक्षस का अपने सुदर्शन चक्र से   सर धण से अलग कर दिया। राक्षस का सर राहु कहलाया और धण केतू। कहा जाता है कि जैसे राहु का सर अलग हुआ वह चन्द्रमा और सूर्य को लीलने के लिए दौड़ने लगा लेकिन विष्णुजी ने ऐसा नहीं होने दिया। उस दिन से माना जाता है कि जब भी सूर्य और चन्द्रमा निकट आते हैं तब उन्हें ग्रहण लग जाता है।


 क्या कहता हैं विज्ञान ?


विज्ञान के अनुसार ये एक खगोलीय घटना हैं जिसमें पृथ्वी, सूर्य ओर चंद्रमा अपनी स्थति से हटकर एक सीध मैं आ जाते  हैं। इससे चांद सूर्य की उपछाया से होकर गुजरता हैं , जिस वजह से उसकी रोशनी फिकी पड जाती हैं।

क्या होता हैं सूर्य ग्रहण ?

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ साथ अपने सौरमंडल के चारों ओर चक्कर लगाती हैं। दूसरी ओर चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है ओर उसके चक्कर लगता इसलिए जब चंद्रमा चक्कर लगते लगते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है तब पृथ्वी ओर सूर्य आंशिक या पूर्ण  रूप से दिखना बंद हो जाता है इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहते है ।


सूर्य ग्रहण के समय क्या न करें  :


. घर में रखे अनाज या खाने को ग्रहण से बचाने के लिए दूर्वा या तुलसी के पत्ते का प्रयोग करना चाहिए।


. ग्रहण समाप्त होने के बाद तुरंत स्नान कर लेना चाहिए। इसके साथ ही ब्राह्मण को अनाज या रुपया दान में देना चाहिए।


. ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए।

.मान्यता है कि गर्भवती स्त्री को ग्रहण नहीं देखना चाहिए।


.भगवान शिव को छोड़ अन्य सभी देवताओं के मंदिर ग्रहण काल में बंद कर दिए जाते हैं।












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