वैवाहिक निमंत्रण पत्र ७० के दशक से

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         आयुष्मती रीमा           
         आत्मजा श्री बाबू जी
         निवासी (ग्राम पसेना)
         जिला आगरा
                                    एवं
                                                                                                                                 चि राजेश
                                                 आत्मज श्री रामराज जी
                                                 निवासी (खेडिया)
                                                 जिला इटावा


* पाणिग्रहण अवसर पर वर पक्ष की सेवा मे सादर समर्पित *




                                *स्वागत पत्र *

चलती पवन आज मन्थर गति से ।
फूलों के योवन को जाकर हिलाता।।
करने को स्वागत हो फूलों को लेकर।
राजेश के चरणो को चढ़ाता।।

आज हमारा ग्राम पसेना फूला नही समाता हैं।
खेडिया के गौरव को अपना शीश झुकाता हैं।।
दरवाजे पर जीवन निधि तुम आये क्या सम्मान करू।
उपहार तुम्हीं से मैंने पाया क्या मै अब उपहार करू।।
कैसा मधुमय आज दिवस है कितनी सुंदर बेला है।
दो हर्दय का मिलन देखने दो परिवारो का मेला है।।
भगवत की उस अनुकम्पा से सदा वसंत बहार रहे ।
राजेश अरू रीमा  के प्यार का बजता तार रहे।।
नही जानता स्वगत आगत फिर भी स्वगत गान करू।
दरवाजे आये हो तो  कम से कम कुछ दान करु।।
अपने घर की एक वस्तु मैं सविनय तुमको देता हू।
अपने घर की उसी वस्तु का परिचय तुमको देता हू।।
प्यार भरा संसार प्रभु मैं आज पदों पर धारत हू।
अरमानों की दुनिया को मैं आज समर्पित करता हू।।
धरी धरोहर अब तक घर में मैं था केवल रखवाला।
लीजे अपनी आज धरोहर लीजिए अपनी जय माला ।

* जन्म काल *

तेरी जन्म समय पर बेटी नही किसी जा मान किया।
पंडित लौटे बँधी पत्तरी नहीं किसी को दान दिया।।
बाजे ना बजवाये घर पर ढोलक की ना गुमक हुई।
नाच रंग ना बजीं बधाई जगे दीप ना चमक हुयी ।।
आज देख ले बेटी घर पर खुशियों के बादल छाये।
ओर देखले दो दो पंडित लिये पत्तरी घर आये ।।
आज पिता ने दरवाजे पर कितनों का सम्मान किया।
दोनो कर से पग धो कर तन मन धन का दान किया।


  *  शिक्षा बेटी को *


तू जाती है  तो जा बेटी  पर  ,अंतिम  शिक्षा  लेती जा ।
मात  पिता की ये  अभिलाषा अंतिम  दिशा  लेती जा ।।
सास  ससुर की सेवा निश  दिन हँसी  खुशी से तू  करना।
जीवन का अधार समभक्त कर पती देव को खुश करना।।
चाचा चाची की अपने कुल की अविचल जग मै धाक रहे।
देखो  विप्रवंश  की    बेटी  जग  मैं   ऊँची    नाक  रहे ।।
मोद  प्रमोद  खिलौना मेरा  मानवता   का   सार     यही।
कर्मों का प्रतिकार यही  है  जीवन   का  इतिहास यही।।

   * प्रार्थना वर परिवार से *

     घर से बाहर न निकली हैं संग तुम्हारे जाएगी।
    दीना दो दीना इसको रोटी ससुरे की ना भाएगी।।
    याद  करेगी  अपने  घर  की  सोवेगी ना जागेगी।
    घुँघट मैं  ही  हिचकी ले ले डरती  डरती रोवेगी।।
    पूछोगे क्यों रोती  है  क्या अपने घर तू  जायेगी ।
    ना मैं रोती ना मैं घर जाउ सत्य नही बतलायेगी ।
    सास ससुर की आहट पाकर ,बरबस आंसू रोकेगी।
    नाम  श्याम  सुने  जब सोते  मैं  यह  चौंकेगी।।
    क्रोधित होगें यदि तुम प्रिय वर मोती गिरकर बरसेंगे।
    भिड़कोगे तो इन  नैनो  से सावन  भादों  बरसेंगे।।
    सदा सांत्वना देते रहना ,तुम्हे मोल न देता हूं ।
   सूता रीमा  का हाथ पकड़कर हाथ हाथ मैं देता हूँ।।
    हाथ पकड़ कर दिया हाथ मैं इसके जिम्मेदार हुऐ।
    इसकी जीवन नैय्या  के ,तुम  पूरे  ठेकेदार हुए।।
    संसार मैं अब 'राम ' बनेंगे उनमें इनकी गिनती है।
 यह सुंदर जोड़ी अमर रहे गोपीकृष्ण हमारी विनती है।।



 *अनुराग दीप *  

 अनुराग भरे इस दीपक को,
   निज अचल अडंक छिपाते चलो।
  तुम आगे चलो हम पीछे चले ,
  पद धूली तुम्हारी उठाते चलें ।।
   तुम क्रोध करो हम मोन रहे ,
   तुम रूठो तो नाथ मानते चले ।।
    तुम पोंछते हाथों से अंशू चलो,
   हम पीछे से अंशू बहते चले।।


* कन्या को आशीर्वाद *

चाह यहि  त्रषि नारद की ।
तबलों कर वीणा बजाते  रहें।।
जबलों जग के तम नाशन को ।
 रवि अरु अशि ज्योती जागते रहे।।
जबलों राम धरातल के ।
सहसासन भार उठाते रहे।।
तबलों प्रिय शिवाला के भाल पै ।
सुहग के चिन्ह लखाते ।।


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