गो हत्या रोकना - मुंशी प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचंद गोपालजी
प्रसिद्ध उपन्यास-लेखक मुंशी प्रेमचंद जी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अध्यापक थे। उन्होंने अपने यहां गाय पाल रखी थीं। एक दिन एक गाय घास खाते हुए अंग्रेज़ जिलाधीश के आवास के बाहर वाले उद्यान में चली गईं।
अभी वह गाय वहां जाकर खड़ी ही हुई थी कि वह अंग्रेज़ बंदूक लेकर बाहर आ गया और उसने गुस्से से आग बबूला होकर बंदूक में गोली भर ली। उसी समय अपनी गाय को खोजते हुए प्रेमचंद वहां पहुंच गए।
अंग्रेज़ ने कहा कि 'इस गाय ने मेरे उधान का नुक्सान किया है यह गाय अब तुम यहां से ले नहीं जा सकते। तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम अपने जानवर को मेरे उद्यान में ले आए। मैं इसे अभी गोली मार देता हूं तभी तुम काले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि हम यहां हुकूमत कर रहे हैं।' और उसने भरी बंदूक गाय की ओर तान दी।
प्रेमचंद ने नरमी से उसे समझाने की कोशिश की, 'महोदय! इस बार गाय पर मेहरबानी करें। दूसरे दिन से इधर नहीं आएगी। मुझे ले जाने दें साहब। यह ग़लती से यहां आई।' फिर भी अंग्रेज़ गुस्से में यही कहता रहा, 'तुम काला आदमी ईडियट हो- हम गाय को गोली मारेगा।' और उसने बंदूक से गाय को निशान बनाना चाहा।
प्रेमचंद झट से गाय और अंग्रेज़ जिलाधीश के बीच में आ खड़े हुए और गुस्से से बोले, 'तो फिर चला गोली। देखूं तुझमें कितनी हिम्मत है। ले। पहले मुझे गोली मार।' फिर तो अंग्रेज़ बंदूक की नली नीची करते हुए अपने बंगले में चला गया।
भारत में गाय को देवी का दर्जा प्राप्त है । ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है । यही कारण है कि दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गायों की विशेष पूजा की जाती है और उनका मोर पंखों आदि से श्रुंगार किया जाता है ।प्राचीन भारत में गाय समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी । युद्ध के दौरान स्वर्ण, आभूषणों के साथ गायों को भी लूट लिया जाता था । जिस राज्य में जितनी गायें होती थीं उसको उतना ही सम्पन्न माना जाता है । कृष्ण के गाय प्रेम को भला कौन नहीं जानता । इसी कारण मुंशी प्रेमचंद जी का एक नाम गोपाल भी है ।
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