ईमानदारी का साथ कभी नही छोड़ना चाहिये ,परिस्थितियां चाहे केसी भी हो जाये
एक व्यापारी के पास दो हीरे थे, एक असली और दूसरा नकली, उसने राजा ने कहा कि कोई इन हीरों की पहचान नहीं कर सकता, राजा भी असली हीरे को नहीं पहचान पाए, तब एक अंधे ने बता दिया असली हीरा कौन-सा है
किसी नगर में एक राजा रहता था। एक दिन उसके पास एक व्यापारी आया। उसने राजा से कहा कि- मेरे पास दो हीरे हैं, दोनों एक जैसे दिखते हैं, लेकिन इनमें से एक नकली है और दूसरी असली। अगर आप या आपके नगर में कोई और ये बता दे कि कौन-सा हीरा असली है और कौन-सा नकली तो मैं आपको ये हीरा उपहार में दे दूंगा और अगर कोई न बता पाया तो आपको इस हीरे का मूल्य मुझे देना होगा।
राजा ने जब दोनों हीरों को देखा तो वो भी पहचान नहीं पाए। राजा ने व्यापारी से कहा कि- कल हम महल के बाहर हमारे बगीचे में इन हीरों को रखेंगे, तब हमारे नागरिक और मंत्री आपके इस प्रश्न को उत्तर देंगे। व्यापारी ने कहा ठीक है। राजा ने राज्य में इस बात का एलान करवा दिया।
अगले दिन राजा के बगीचे में बहुत से लोग आए। राजा ने ये भी कहा कि जो गलत उत्तर देगा और सजा भी दी जाएगी। बहुत सारे लोग आए, उन्होंने दोनों हीरों को देखा, लेकिन कोई भी जवाब नहीं दे पाया, क्योंकि उन्हें लगा कि अगर उनका उत्तर गलत निकला तो राजा उसे सजा देंगे। इस तरह बहुत देर हो गई।
कुछ देर बाद एक अंधा आदमी राजा के पास आया और बोला कि- मैं बता सकता हूं कि कौन-सा हीरा असली है और कौन-सा नकली। उसकी बात सुनकर राजा के मंत्री हंसने लगे। राजा ने उसे एक मौक दे दिया। उस अंधे आदमी ने दोनों हीरों को हाथ लगाया और बता दिया कि कौन-सा हीरा असली है।
व्यापारी ने भी मान लिया कि अंधा जो बोल रहा है, वह सच है। राजा ने अंधे से पूछा कि- तुम्हें कैसे पता चला कि कौन-सा हीरा नकली है और कौन-सा नकली। अंधे ने कहा कि- मैंने जब पहले हीरे को छुआ तो वह धूप की वजह से गर्म हो चुका था, जबकि दूसरा हीरा बिल्कुल ठंडा था। जो धूप में गर्म हो गया वह कांच का टुकड़ा था और दूसरा असली हीरा।
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)

No comments :
Post a Comment