नवरात्रि मैं कैसे करें कलश स्थापना?
||ॐ||नवरात्रि मैं कैसे करें कलश स्थापना||ॐ||
कलश स्थापना विधि -
महर्षि वेद व्यास से द्वारा भविष्य पुराण में बताया गया है की कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से शुद्ध किया जाना चाहिए | उसके उपरान्त एक लकड़ी का पाटे पर लाल कपडा बिछाकर उसपर थोड़े चावल गणेश भगवान को याद करते हुए रख देने चाहिए | फिर जिस कलश को स्थापित करना है उसमे मिट्टी भर के और पानी डाल कर उसमे जौ बो देना चाहिए | इसी कलश पर रोली से स्वास्तिक और ॐ बनाकर कलश के मुख पर मोली से रक्षा सूत्र बांध दे | कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रख दे और फिर कलश के मुख को ढक्कन से ढक दे | ढक्कन को चावल से भर दे | पास में ही एक नारियल जिसे लाल मैया की चुनरी से लपेटकर रक्षा सूत्र से बांध देना चाहिए | इस नारियल को कलश के ढक्कन रखे और सभी देवी देवताओं का आवाहन करे | अंत में दीपक जलाकर कलश की पूजा करे | अंत में कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ा दे | अब हर दिन नवरात्रों में इस कलश की पूजा करे |
पूजन सामग्री -
2 - जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिटटी |
3 - पात्र में बोने के लिए जौ |
4 - कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल |
5 - मोली |
6 - इत्र |
7 - साबुत सुपारी |
8 - दूर्वा |
9 - कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के |
10 - पंचरत्न |
11 - अशोक या आम के 5 पत्ते |
12 - कलश ढकने के लिए मिटटी का दीया |
13 - ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल |
14 - पानी वाला नारियल |
15 - नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा |
16 – अखंड ज्योति (एक ऐसा दीपक जिसको आप १० दिन तक जला सके, इस बात का ध्यान रहे की दीपक बुझे नहीं इससे आपके घर में एक दिव्य वातावरण पैदा होगा)
जौ बोना चाहिए -
कलश के चारों ओर गीली मिट्टी लगाकर उसमें जौ बोना चाहिए | जौ चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे | इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं | अब कलश के कंठ पर मोली बाँध दें तत्पश्चात कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें | कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें | कलश में थोडा सा इत्र दाल दें | कलश में पंचरत्न डालें | कलश में कुछ सिक्के डाल दें | कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें | अब कलश का मुख मिट्टी/स्टील की कटोरी से बंद कर दें और उस कटोरी में चावल भर दें |
कलश के चारों ओर गीली मिट्टी लगाकर उसमें जौ बोना चाहिए | जौ चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे | इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं | अब कलश के कंठ पर मोली बाँध दें तत्पश्चात कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें | कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें | कलश में थोडा सा इत्र दाल दें | कलश में पंचरत्न डालें | कलश में कुछ सिक्के डाल दें | कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें | अब कलश का मुख मिट्टी/स्टील की कटोरी से बंद कर दें और उस कटोरी में चावल भर दें |
नारियल का मुख किस तरफ रखना चाहिए -
नारियल पर लाल कपडा लपेट कर मोली लपेट दें | अब नारियल को कलश पर रख दें | नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है | शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है | नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है | इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे |
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