आखिरी पत्ता motivational story in hindi

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अन्तिम पत्ता  ( "द लास्ट लीफ")  ओ हेनरी द्वारा रचित एक लघु कथा है। ग्रीनविच गाँव में में रहने वाले लोंग और उनके विषयों के बारे में इसमें बताया जाता है। वाशिंगटन स्क्वायर के पश्चिम में एक छोटी सी बस्ती में बहुत सारे छोटे रास्तों वाली उलझी हुई गलियाँ थीं । जिन्हें वहाँ के लोग ‘प्लेसेस’ कहते थे। इसमें कलाकारों को बहुत बड़ी संभावना दिखी। इस ओल्ड ग्रीनविच विलेज में कई कलाकार आकर बसने लगे जिनको कम किराए वाले अटारियों और उत्तर की तरफ खिड़कियोँ वाले घर की तलाश रहती थी। वहीं एक बंगले के तीसरे माले पर सू और जोन्सी का स्टूडियो था। दोनों एट्थ स्ट्रीट के डेलमोनिको रेस्त्रां में मिले थे। वे एक दूसरे की कला और पूरे बदन ढँके पहनावे से इतने प्रभावित हुए कि एक ज्वाइंट स्टूडियो बना ली।
         

कहानी :  नवंबर माह आ चुका था और एक अज़नबी सर्दी ने दस्तक दी। पूर्वी तरफ तो इस विनाशक रोग ने तेजी से पाँव पसारा और कई लोगों को अपना शिकार बनाया। जोहंसी बिमार पड़ गयी है और निमोनिया की वजह से मर रही है। वह अपने कमरे की खिड़की के बाहर एक लता (बेल) से गिरते हुए पत्तों को देखती है और विचार कर लेती है कि जब अंतिम पत्ता गिरेगा तो वो मर जायेगी। तब उसके साथ रह रही उसकी सब से अच्छी मित्र सू, निराश होकर उसे ऐसा सोचने से रोकने की कोशिश करती है।एक बेहराम नामक बुढ़ा निराश और असफल कलाकार उनके नीचे के मकान में रहता है। वह दावा करता है कि वो एक अतिउत्तम रचना का निर्माण करेगा, यद्दपि उसने कभी भी यह कार्य आरम्भ नहीं किया। सू उसके पास जाती है और उसे बताती है कि उसकी दोस्त जोहंसी निमोनिया से मर रही है और दावा कर रही है कि जब उसके कमरे की खिड़की के बाहर की लता का अन्तिम पत्ता गिरेगा तो वह मर जायेगी। बेहराम ने इसका मजाक उडाया और इसे उसकी मुर्खता बताया लेकिन जैसा कि वह इन दो युवा कलाकारों का रक्षक था अतः उसने जोहंसी और लता को देखने का निर्णय किया।

रात में एक बहुत ही बुरी आँधी आती है और हवा सरसराहट कर रही है और बारिश की छिंटे लगातार खिड़की पर गिर रही हैं। सू खिड़कियाँ और पर्दे बंद कर देती है और जोहंसी को सोने के लिए कहती है, यद्दपि लता पर अब भी एक पत्ता बचा हुआ था। जोहंसी विरोध करती है लेकिन वह जोर देकर ऐसा करने को कहती है क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि जोहंसी अन्तिम पत्ते को गिरते हुए देखे। सुबह, जोहंसी लता को देखना चाहती है कि सभी पत्ते गिर चुके हैं लेकिन उसे आश्चर्य होता है कि अभी भी एक पत्ता बचा हुआ है।

जब जोहंसी हैरान हुई कि वह अब भी वहीं था, तो वह हठ करती है कि यह आज गिरेगा। लेकिन ऐसा नहीं होता है और वह ना ही रात को गिरता है और न ही अगले दिन। जोहंसी को मान लेती है कि यह पत्ता उसे यह दिखाने के लिए ही वहाँ रुका हुआ है कि वह कितनी निर्वल  है जो उसने मृत्यू चाहने जैसा पाप किया। उसने अपने आप को जीने के लिए पुनः तैयार किया और उसकी हालत में बहुत सुधार आता है।

जब जोहंसी पर्याप्त रूप से स्वस्थ हो जाती है, तब सू उसे बताती है कि उनके पड़ोसी बेहर्मन की निमोनिया के कारण मृत्यु हो गई है और वास्तव में जोहंसी के जीवित रहने के खातिर, शेष बची हुई पत्ती बेहर्मन की सबसे उत्तम रचना थी।


प्ररेणा :


अन्तिम पत्ते की इस काहनी से हमें ये शिक्षा मिलती हैं कि ज़िन्दगी मैं कितनी भी बिषम परिस्थितियों क्यों न हो हमें हिम्मत नही हारनी चाहिए और न ही कभी नकारात्मक सोचना चाहिए। नकारात्मक सोच इंसान को निर्वल बना देती है ।

                                                                

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