माँ के गर्भ मैं नो महीनों का सफर : लेनार्ट निल्सन स्वीडन
माँ बनना हर औरत के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है। जब उसे पाता चलता है । वह गर्भवती है तो ये पल सबसे पहले वो अपने पति के साथ साझा करती हैं। औरत गर्भवती होती है , तो ये पल सिर्फ उसके लिए ही खुशियों से भरे नहीं होते, बल्कि परिवार और विशेषकर पिता के लिए भी ये पल आनंद से भरे होते हैं। 1965 की बात है ,तभी एक वैज्ञानिक ने लेनार्ट निल्सन ने उन्होंने उन औरतों को ध्यान में रख कर जो मां बनने वाली हैं, किताब छापी। जिसका नाम A child is Born था । इस किताब में कई डॉक्टर्स ने भी अपने इनपुट दिए थे। इसमें कुछ बहुत ही खास था, दुनिया पहली बार गर्भ के अंदर भ्रूण को देख पा रही थी। वो अजन्मे बच्चे की फोटो गर्भ के अंदर से खींच लाए । उन्होंने मैक्रो लेंसेज,स्कैनिंग इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोपऔर एंडोस्कोपिक कैमरों की मदद ली थी।तस्वीरों में चीजों को कई गुना बड़ा कर दिखाया।इस किताब को लाने के पीछे निल्सन का मकसद उन भ्रांतियों और मिथकों को तोड़ना भी था जो प्रेग्नेंसी के साथ जुड़े होते हैं।
लेनार्ट निल्सन स्वीडन के फोटोग्राफर और वैज्ञानिक हुए हैं. कहां पढ़ते क्या खाते थे जैसी बातें छोड़ें. तो बारह साल की उम्र में उनके हाथ में कैमरा पकड़ा दिया गया था. 16 बरस की उम्र में एक डॉक्यूमेंट्री देख उन्हें माइक्रोस्कोपी में दिलचस्पी हुई. 25 साल के होते-होते वो एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर बन चुके थे।
30 अप्रैल 1965 को लाइफ मैगजीन ने अपना जो इश्यू निकाला. उसमें The Drama of Life Before Birthशीर्षक से कवर स्टोरी थी. उस इश्यू में इसी किताब से सोलह फोटोज ली गईं थीं. गर्भ के अंदर की फोटोज के प्रति जनता का रिएक्शन कुछ ऐसा था कि मैगजीन की अस्सी लाख प्रतियां चार ही दिनों में बिक गईं. इस सबके बाद निल्सन को अमेरिकन नेशनल प्रेस एसोसिएशन पिक्चर ऑफ द ईयर अवार्ड मिला था।लेनार्ट को इस किताब को पूरा करने के लिए पूरे 12 साल लगे थे. इन तमाम फोटोज के लिए वो 1953 से मेहनत कर रहे थे।
प्रथम मास :
दूसरा मास :
तिसरा मास :
चौथा मास:
लेनार्ट निल्सन स्वीडन के फोटोग्राफर और वैज्ञानिक हुए हैं. कहां पढ़ते क्या खाते थे जैसी बातें छोड़ें. तो बारह साल की उम्र में उनके हाथ में कैमरा पकड़ा दिया गया था. 16 बरस की उम्र में एक डॉक्यूमेंट्री देख उन्हें माइक्रोस्कोपी में दिलचस्पी हुई. 25 साल के होते-होते वो एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर बन चुके थे।
30 अप्रैल 1965 को लाइफ मैगजीन ने अपना जो इश्यू निकाला. उसमें The Drama of Life Before Birthशीर्षक से कवर स्टोरी थी. उस इश्यू में इसी किताब से सोलह फोटोज ली गईं थीं. गर्भ के अंदर की फोटोज के प्रति जनता का रिएक्शन कुछ ऐसा था कि मैगजीन की अस्सी लाख प्रतियां चार ही दिनों में बिक गईं. इस सबके बाद निल्सन को अमेरिकन नेशनल प्रेस एसोसिएशन पिक्चर ऑफ द ईयर अवार्ड मिला था।लेनार्ट को इस किताब को पूरा करने के लिए पूरे 12 साल लगे थे. इन तमाम फोटोज के लिए वो 1953 से मेहनत कर रहे थे।
फेलोपियन ट्यूब में स्पर्म
प्रथम मास से नौंवे मास तक माँ के गर्भ में बच्चे का विकास:
प्रथम मास :
- शिशु एक पानी भरी थैली में होता है
- उसकी लंबाई मात्र 0.6 से.मी. होती है।
- शिशु की लंबाई व वजन में तेजी से बढ़ोतरी होती है।
दूसरा मास :
- श्रवण और दृष्टि इंद्रिया विकसित होने लगती हैं। पलकें बंद रहती हैं।
- चेहरे के नैन-नक्श बनने लगते हैं।
- हाथ-पैर की उंगलियां व नाखून बनने लगते हैं।
- दिमाग का विकास होने लगता है ।
- अमाशय, यकृत, गुर्दे का विकास होता है।
- शिशु की लंबाई करीब 3 से.मी. और वजन 1 ग्राम होता है
- आकार बहुत छोटा होने से शिशु की हलचल महसूस नहीं की जा सकती है।
- आंखें बन चुकी होती हैं, लेकिन पलकें अभी भी बंद होती हैं।
- बाजू, हाथ, उंगलियां, पैर, पंजे और पैरों की उंगलियां व नाखून इस महीने में विकसित होते हैं।
- शिशु के वोकल कॉर्डस बन चुके होते हैं। शिशु सिर ऊपर उठा सकता है।
- यदि गर्भाशय के अंदर झांका जाए तो बाहरी जननांग बनते हुए दिख सकते हैं।
- शिशु की लंबाई व वजन में तेजी से बढ़ोतरी होती है।
- बाल आने लगते हैं और सिर पर बाल दिखने लगते हैं।
- भौहें और पलक के बाल आने लगते हैं।
- चमड़ी वसायुक्त होने लगती
- जब खून दौड़ने के लिए नलियां बनना तैयार होने लगती हैं.
- शिशु कुछ समय गतिशील रहता है तो कुछ समय शांत।
- एक सफेद चिकना स्त्राव शिशु की त्वचा की एम्नीओटिक पानी से रक्षा करता है।
- उसकी त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाती हैं। त्वचा का रंग लाल होता है।
- त्वचा ज्यादा वसायुक्त बनती है।
- इस महीने शिशु की लंबाई करीब 25 से 30 से.मी. और वजन करीब 200 से 450 ग्राम होती है।
- भ्रूण जो बाहर की आवाजें सुन सकता है
छठा मास :
- त्चचा अभी झुर्री भरी और लाल है।
- आंखों का विकास पूरा हो जाता है।
- पलकें खुल सकती हैं। बंद हो सकती हैं।
- शिशु रो सकता है, लात मार सकता है। उसे हिचकी आ सकती है।
सातवा मास :
- यदि कोई गर्भवती के पेट पर कान रखे तो शिशु की धड़कन सुनाई दे सकती है
- शिशु माँ के गर्भ में अंगूठा चूसता है।
- इस महीने शिशु की लंबाई 32-42 से.मी. होती है। वजन करीब 1100 ग्राम से 1350 ग्राम होता है।
अठवांं मास :
- शिशु की आंखें खुलती हैं।
- जागने-सोने की खास आदत के साथ शिशु सक्रिय रहता है।
- इस महीने शिशु का वजन करीब 2000 - 2300 ग्राम है और लंबाई 41-45 से.मी है।
नौवां मास :
- शिशु का सिर नीचे व पैर ऊपर की तरह होते हैं।
- बच्चा ज्यादा शांत रहता है।
- इस महीने शिशु की लंबाई 50 से.मी. है और वजन 3200-3400 ग्राम है।
- बच्चा मा के गर्भ से निकलने का इंतजार करता है।
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Very informative
ReplyDeleteThanku
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