आजादी की कहानी
भारत को आजादी कैसे मिली ?
भारत को आजादी उतनी आसानी से नहीं मिली है। इस आजादी के लिए हमारे देश के वीर सपूत ने खून पसीना एक कर दिया है ।अंग्रेजो से भारत को छुड़ाने के लिए न जाने कितने वीर सपूत ने अपनी जान की बाजी लगा दी कई स्वतंत्रा सेनानियों ने हंसते-हंसते अपने प्राण भारत मां की आजादी के लिए न्योछावर कर दिए । सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत लंबे समय तक अंग्रेजों का गुलाम रहा लेकिन यहाँ की माता ,बहने ओर भारतवासियो की एक सोच एक संकल्प और एक विश्वास ने हमें उनसे आजाद करा दिया। देखिय क्या संकप था ।15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद हुआ था ।
"आग मेरे सीने में हो या तेरे सीने में, बेटा मेरा हो या तेरा, देश स्वतंत्रता होना चाहिये "
आज हम अपने घरों में जितने शुकून से वह सब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की देन है यदि वह स्वतंत्रा सेनानी (बटुकेश्वर दत्त ,भगत सिंह चंद्रशेखर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्रीमती सरोजिनी नायडू ,मातंगिनी हाजरा और सिस्टर निवेदि) घर में बैठे-बैठे और आजादी की पहल ना करते तो आज शायद हम किसी अंग्रेज के गुलाम बने होते।
मंगल पाण्डेय ने की क्रांति की शुरुआत :
कहा जाता है कि भारत स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रांति का बहुत ही बड़ा महत्व है यह लड़ाई अंग्रेजों से आजादी की पहली लड़ाई मानी जाती है और यह लड़ाई पूर्ण रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध में की गई थी और इस क्रांति का आरंभ किया था मंगल पांडे ने मंगल पांडे ने ही इस क्रांति की शुरुआत की थी मंगल पांडे एक ब्रिटिश रेजीमेंट सैनिक थे गाए कारतूस में गाय के मांस और चर्बी का इस्तेमाल करने से वह मना करते थे उसके खिलाफ गाय को बचाने के लिए उन्होंने यह बगावत शुरू की इस बगावत में उन्होंने बैरकपुर रेजीमेंट के एक अवसर को मौत के घाट उतार दिया था इस घटना के बाद हर भारतीय के मन में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी लेकिन ब्रिटिश लोगों ने मंगल पांडे का जीवन का अंत कर दिया उन्हें फांसी की सजा दे दी वहां आजादी की लड़ाई लड़ते लड़ते शहीद हो गए।
15 अगस्त का दिन हम आजादी का दिन मनाते हैं इसमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का खून मिला हुआ है इस आजादी में हमारे सेनानियों के रक्त की एक एक बूंद शामिल है जो कहते थे हम अंग्रेजों को भारत से खदेड़ देंगे और उन्होंने ऐसा किया जिसकी बदौलत आज हम आजादी का जश्न मना रहे हैं. भारत की आजादी के लिए कई लोगों ने अपनी जान की बाजी लगा दी ब्रिटिश हुकूमत को भारत से खदेड़ने के लिए उन्होंने जी जान लगा दिया 1947 का वह दिन आज भी जब किसी को याद आता है तो हम गर्व से अपना सीना चौड़ा कर भारत मां की जय बोलते हैं क्योंकि 15 अगस्त 1947 का यह वह दिन है जब हमें अंग्रेजों से पूर्ण रूप से आजादी मिली थी।
।।जय हिंद ।।
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